दिनकर अपने युग के प्रथम पांक्तेय विभूतियों में रहे, उनके साहित्य में हमारा पारम्परिक दर्शन और विचारधारा तथा पाश्चात्य चिन्तकों की सोच, दोनों का सम्मिश्रण तो नहीं कहना चाहिए, बल्कि ज़्यादा उपयुक्त होगा कहना कि दोनों को आत्मसात् करने के पश्चात् जो रत्न नितान्त मौलिक तौर पर अभिव्यक्त होता है, वह उनके काव्य और उनके साहित्य का सौन्दर्य है। दिनकर जी यदि कवि नहीं, केवल गद्यकार ही होते तो आज उनका स्थान कहाँ होता? यह सवाल अक्सर मेरे मन में उठता है और तब मुझे लगता है कि कदाचित् उनके विराट कवि व्यक्तित्व ने उनके गद्यकार को ढक लिया है। यह निश्चित है कि पूज्य दिनकर जी यदि मात्र गद्य लेखक ही होते तब भी उनकी गणना हिन्दी के श्रेष्ठतम गद्य लेखकों में होती। किन्तु जैसे रेणुका, हुंकार, रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र और परशुराम की प्रतीक्षा के रचयिता और रसवन्ती तथा उर्वशी के रचयिता एक ही कवि का होने के कारण रसवन्ती और उर्वशी की कोमल, मृदु और आध्यात्मिक धारा की अवहेलना हो जाती है, वैसे ही दिनकर के विराट और विशाल कवित्व के कारण उनका गद्य उपेक्षित हो गया है।
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Arvind Kumar Singh
अरविन्द कुमार सिंह
साहित्यकार, कवि एवं लेखक, प्रबन्ध न्यासी व सचिव-दिनकर संस्कृति संगम न्यास ।
शिक्षा : एम.बी., एम.कॉम., एल.एल.बी. ।
प्रमुख पुस्तकें : काव्य-पुस्तकः नदी; संस्मरण : दिनकर के आसपास; सम्पादन : ज्योतिर्धर कवि दिनकर, शेष निःशेष, संसद में दिनकर, कविता की पुकार, दिनकर के पत्र आदि ।
सम्मान : थावे विद्यापीठ द्वारा मानद ‘विद्या वाचस्पति’ की उपाधि, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा ‘हिन्दी रत्न सम्मान’, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् द्वारा ‘नवोदित साहित्यकार पुरस्कार’, सन् 1991 में तत्कालीन माननीय उपराष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा द्वारा ‘राष्ट्रकवि दिनकर प्रतिभा सम्मान’, विश्व हिन्दी परिषद् एवं केन्द्रीय हिन्दी संस्थान द्वारा ‘राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिन्दी रत्न सम्मान’, आस्था साहित्य संस्थान अलवर, राजस्थान द्वारा सम्मानित । ‘पी.सी. इंडियन एचिवर्स अवार्ड’ जो राष्ट्रकवि दिनकर जी को मरणोपरान्त दिया गया, वह केन्द्रीय मन्त्री माननीय श्री नितिन गडकरी से प्राप्त किया।
‘चैम्पियन ऑफ़ चेंज अवार्ड’ जो राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी को मरणोपरान्त दिया गया, वह भारत के पूर्व राष्ट्रपति माननीय श्री रामनाथ कोविन्द
जी के द्वारा प्रदान किया गया । सत्यम् शिवम् सुन्दरम् ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट की ओर से ‘बिहार गौरव सम्मान’ की प्राप्ति। इसके अतिरिक्त विभिन्न साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित । सन् 2015 में भारत के प्रधानमन्त्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘दिनकर परिवार’ को सम्मानित करने के क्रम में सम्मानित । विभिन्न टी.वी. चैनलों में वार्ता और संवाद ।
स्थायी निवास : दिनकर भवन, आर्य कुमार रोड, पटना-800004
Weight
300 g
Brand
Vani prakashan
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